वेलोसिरैप्टर असल में टर्की जितना था, इंसान जितना नहीं

असली वेलोसिरैप्टर एक बड़े टर्की जितना था। हमारे कार्ड पर नाक से पूँछ तक उसकी लंबाई दो मीटर है और वज़न क़रीब 15 किलो। वह किसी बड़े आदमी की कमर तक ही आता था, दरवाज़े जितना ऊँचा तो बिल्कुल नहीं। फ़िल्मों वाला वेलोसिरैप्टर दरवाज़े का हैंडल तक घुमा लेता है। असल में फ़िल्म वालों ने नाम तो ‘वेलोसिरैप्टर’ का लिया, लेकिन शरीर उसके एक बड़े अमेरिकी रिश्तेदार जैसा बना दिया।

टर्की के बगल में रखकर देखो

दो मीटर की लंबाई में उसकी लंबी पूँछ भी गिनी गई है। इसका मतलब यह नहीं कि खड़ा होने पर वेलोसिरैप्टर दो मीटर ऊँचा था। उसका वज़न बस 15 किलो के आसपास था, जबकि टायरानोसॉरस कहीं ज़्यादा भारी था।

हमारे कार्ड पर टायरानोसॉरस लगभग 12 मीटर लंबा और 8 टन का है। दोनों को एक ही पैमाने पर बनाओ, तो फ़र्क अपने-आप दिख जाएगा।

फ़िल्मों ने इसे इतना बड़ा क्यों बना दिया?

पीछा करने वाले दृश्य रोमांचक बनाने के लिए फ़िल्मों में जीवों का आकार और बर्ताव बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। नाम ‘वेलोसिरैप्टर’ का रखा गया, लेकिन आकार उसके बड़े रिश्तेदार डाइनोनिकस से लिया गया।

फ़िल्में प्राचीन जीवों में दिलचस्पी ज़रूर जगाती हैं। मगर उनका असली आकार और रूप जानना हो, तो जीवाश्मों के सबूत भी देखने चाहिए।

उसके पर थे, फिर भी वह उड़ नहीं सकता था

उसकी बाँह की हड्डी पर वे छोटे उभार मिले हैं जिनसे पर जुड़े होते थे — ठीक पक्षियों की तरह। उसकी बाँहें परों से ढकी थीं, मुँह में दाँत थे और पीछे लंबी, सख़्त पूँछ थी।

फिर भी वह बाज़ की तरह उड़ नहीं सकता था: छोटी बाँहों के मुक़ाबले उसका शरीर बहुत भारी था। उसके पर शायद उसे गर्म रखते थे, कूदते समय संतुलन बनाने में मदद करते थे और घोंसले में अंडे ढकने के काम आते थे। कार्ड पर भी उसे चालाक, फुर्तीला और परों वाला ही बताया गया है।

पंजा असली है, ऊँचाई नहीं

उसके हर पैर पर एक बड़ा, मुड़ा हुआ पंजा था। यह शिकार को दबोचने के काम आता था, दरवाज़े की कुंडी खोलने के नहीं। दौड़ते समय उसकी पूँछ पतवार का काम करती थी, ताकि मुड़ते वक़्त वह गिरे नहीं।

वेलोसिरैप्टर क्रिटेशियस काल में, क़रीब 7.5–7.1 करोड़ साल पहले, आज के मंगोलिया में रहता था। वहाँ तपती धूप और रेत थी, फ़िल्मों जैसा घना हरा जंगल नहीं।

इसे याद कैसे रखें?

‘टर्की जितना आकार, परों वाला शरीर, पैर पर बड़ा पंजा’ — बस इतना याद रखो। कोई फ़िल्म के बारे में पूछे, तो कहना: ‘पर्दे पर उसे बेवजह बड़ा कर दिया गया था।’

तुलना करनी हो, तो पहले वेलोसिरैप्टर का कार्ड खोलो, फिर टायरानोसॉरस का। एक टर्की है, दूसरा बस।

बच्चे अक्सर पूछते हैं

असली वेलोसिरैप्टर कितना बड़ा था?
पूँछ समेत क़रीब दो मीटर लंबा और लगभग 15 किलो का। यानी एक बड़े टर्की जितना, किसी इंसान जितना नहीं।
‘जुरासिक पार्क’ में वह इतना बड़ा क्यों था?
ताकि पर्दे पर ज़्यादा डर लगे। नाम इसका लिया गया और क़द इसके बड़े रिश्तेदार का।
क्या वेलोसिरैप्टर के पर थे?
हाँ। उसकी बाँह की हड्डी पर परों के जुड़ने के पक्के निशान मिले हैं। फिर भी वह उड़ नहीं सकता था।
क्या वे झुंड में शिकार करते थे?
वैज्ञानिक अभी पक्का नहीं जानते कि वेलोसिरैप्टर झुंड में शिकार करता था या नहीं। फ़िल्मों की तरह मिलकर योजना बनाना या दरवाज़ा खोलना जीवाश्मों से साबित नहीं होता।
क्या वह टी. रेक्स को हरा सकता था?
दोनों के आकार में ज़मीन-आसमान का फ़र्क था। ऊपर से वे अलग-अलग समय और जगहों पर रहते थे, इसलिए ऐसी लड़ाई बस कल्पना है।
क्या वेलोसिरैप्टर एक पक्षी है?
नहीं, लेकिन वह पक्षियों का बहुत क़रीबी रिश्तेदार था। पक्षी ख़ुद ज़िंदा डायनासोर हैं — इस पर हमारी अलग गाइड है।

याद रखो

स्रोत

  1. Vicious Velociraptor: tales of a turkey-sized dinosaur Natural History Museum, London · अंग्रेज़ी
  2. Velociraptor Had Feathers American Museum of Natural History · 2007 · अंग्रेज़ी

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