टेरानोडॉन और प्लेसियोसॉरस डायनासोर क्यों नहीं हैं?
टेरानोडॉन डायनासोर नहीं था, और प्लेसियोसॉरस भी नहीं। पहला टेरोसॉर था, यानी उड़ने वाला सरीसृप; दूसरा लंबी गर्दन वाला समुद्री सरीसृप। डायनासोरों का अपना अलग परिवार है, और वे ज़्यादातर ज़मीन पर रहते थे। हमारी साइट पर ये दोनों टायरानोसॉरस के बगल में इसलिए हैं, क्योंकि ये भी उसी बड़े युग में जीते थे और फ़िल्मों में सबको एक साथ दिखा दिया जाता है। ज़माना एक, ख़ानदान अलग।
डायनासोर का मतलब ‘कोई भी पुराना सरीसृप’ नहीं
डायनासोर विकास-वृक्ष का एक ख़ास समूह हैं। कोई जीव इस समूह में आता है या नहीं, यह वैज्ञानिक हड्डियों की बनावट और रिश्तेदारी देखकर तय करते हैं। टायरानोसॉरस, ट्राइसेराटॉप्स, स्टेगोसॉरस और वेलोसिरैप्टर डायनासोर हैं। लेकिन हर प्राचीन सरीसृप डायनासोर नहीं होता।
फ़िल्में अलग-अलग प्राचीन जीवों को एक ही दृश्य में दिखा देती हैं। देखते समय याद रखो कि कहानी एक चीज़ है और वैज्ञानिक वर्गीकरण दूसरी।
टेरानोडॉन: आसमान का जीव, लेकिन डायनासोर नहीं
कार्ड पर टेरानोडॉन के पंखों का फैलाव क़रीब सात मीटर है और वज़न लगभग 25 किलो; वह क्रिटेशियस काल का जीव था। उसका हर पंख चमड़ी की एक झिल्ली था, जिसे एक बेहद लंबी उँगली थामे रहती थी। पक्षियों जैसे परों वाले पंख उसके नहीं थे। वह समुद्र के ऊपर मँडराता और मछलियाँ पकड़ता था।
टेरोसॉर डायनासोरों के क़रीबी रिश्तेदार थे — चचेरे भाई जैसे, सगे नहीं। वे उड़ते थे। पक्षियों को छोड़ दें, तो कोई डायनासोर टेरानोडॉन की तरह आसमान में नहीं उड़ा। और पक्षी ख़ुद डायनासोर हैं — वह अलग कहानी है।
प्लेसियोसॉरस: समुद्र का शिकारी, डायनासोर नहीं
प्लेसियोसॉरस लगभग साढ़े तीन मीटर लंबा था और जुरासिक काल में रहता था। उसकी लंबी गर्दन देखकर ‘नेसी’, यानी लॉक नेस के दानव की याद आती है (हालाँकि नेसी का आज तक कोई सबूत नहीं मिला)। उसके पैर चप्पू जैसे थे और वह पानी में मछलियाँ पकड़कर खाता था। वह कोई ‘तैरना सीख गया डायनासोर’ नहीं था। समुद्री सरीसृपों के अपने अलग समूह थे: इक्थियोसॉर, मोसासॉर और प्लेसियोसॉर।
स्पाइनोसॉरस भी पानी के पास रहकर मछलियाँ पकड़ता था, फिर भी वह डायनासोर है। फ़र्क यह है कि वह ज़मीनी शिकारियों के उस परिवार से था, जिसके कुछ सदस्य नदियों के किनारे शिकार करने लगे। प्लेसियोसॉरस उस परिवार का हिस्सा कभी था ही नहीं।
तस्वीर में इन्हें कैसे पहचानें?
टेरानोडॉन के झिल्ली वाले पंख, प्लेसियोसॉरस के चार चप्पू जैसे पैर और टायरानोसॉरस की मज़बूत पिछली टाँगें देखो। इन्हीं निशानियों से ये जीव अलग-अलग पहचाने जाते हैं।
फिर भी सिर्फ़ शक्ल या रहने की जगह से किसी जीव का वैज्ञानिक समूह तय नहीं होता। शक हो, तो कार्ड पर पढ़ो कि वह किस शाखा का है।
तो फिर ये डायनासोरों की किताबों में क्यों होते हैं?
डायनासोरों के शौक़ीन बच्चे उसी दौर के समुद्री और उड़ने वाले जीवों के बारे में भी जानना चाहते हैं। सबको साथ रखने से मेसोज़ोइक युग की अलग-अलग दुनियाएँ समझना आसान हो जाता है।
लेकिन एक ही युग में रहना और एक ही परिवार का होना दो अलग बातें हैं। और उस युग के सारे जीव एक ही समय पर ज़िंदा भी नहीं थे।
बच्चे अक्सर पूछते हैं
- क्या टेरानोडॉन डायनासोर है?
- नहीं। वह टेरोसॉर था — चमड़ी की झिल्ली वाले पंखों से उड़ने वाला सरीसृप। न वह पक्षी था, न डायनासोर।
- क्या प्लेसियोसॉरस डायनासोर है?
- नहीं। वह समुद्री सरीसृप था, और विकास-वृक्ष पर उसकी शाखा डायनासोरों से अलग है।
- उस ज़माने में कौन-से जीव उड़ते थे?
- टेरोसॉर उड़ते थे। मेसोज़ोइक युग में ही पक्षी भी आए और उड़ने लगे। इनमें से पक्षी डायनासोर हैं, टेरोसॉर नहीं।
- स्पाइनोसॉरस तो पानी के पास रहता था — फिर भी वह डायनासोर है?
- हाँ। वह शिकारी डायनासोरों के परिवार से था, बस शिकार पानी के पास करता था। प्लेसियोसॉरस का कुनबा अलग है।
- कार्टून में सबको एक साथ क्यों दिखाते हैं?
- ताकि देखने में मज़ा आए। वे एक ही बड़े युग में रहते थे, लेकिन उनका ख़ानदान एक नहीं था।
- पक्षी डायनासोर हैं और टेरानोडॉन नहीं — यह कैसे याद रखें?
- पक्षी परों वाले छोटे डायनासोरों से निकले हैं। टेरानोडॉन टेरोसॉर था: उसका हर पंख चमड़ी की झिल्ली थी, जिसे एक बेहद लंबी उँगली थामे रहती थी।
याद रखो
- जिस जीव के चमड़ी वाले डैने हों और सिर पर कलगी, उसके चित्र के नीचे ‘डायनासोर’ मत लिखना।
- ‘नेसी’ लोककथाओं का जीव है। उसकी कहानियाँ यह साबित नहीं करतीं कि प्लेसियोसॉरस आज भी ज़िंदा है।
- तीन कार्ड साथ रखकर देखो: टायरानोसॉरस (हाँ), टेरानोडॉन (नहीं), प्लेसियोसॉरस (नहीं)। बात दिमाग़ में बैठ जाएगी।